कबीरधाम: शिक्षा विभाग में RTI अधिनियम 2005 की उड़ रही हैं धज्जियां, पारदर्शिता पर उठे सवाल
*कवर्धा।* जिले के शिक्षा विभाग में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 का खुला उल्लंघन सामने आया है। विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आवेदक द्वारा विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) को जनसूचना अधिकारी के नाम RTI आवेदन लगाया गया था। नियमानुसार 30 दिवस के भीतर जानकारी देना अनिवार्य है, लेकिन 30 दिन बीत जाने के बाद भी आवेदक को कोई जवाब नहीं दिया गया।
जवाब न मिलने पर आवेदक ने नियमानुसार प्रथम अपील अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कबीरधाम के समक्ष दिनांक *6 अगस्त 2026* को प्रथम अपील दायर की।
*जानबूझकर देरी से भेजा पत्र, तारीखों में भारी गड़बड़ी*
प्रथम अपील के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से सुनवाई के लिए नियत तिथि *5 सितंबर को दोपहर 12 बजे* निर्धारित की गई। इस संबंध में पत्र क्रमांक जारी दिनांक *27 अगस्त* को दिखाया गया है, लेकिन इस पत्र को पोस्ट *3 सितंबर* को किया गया। नियत तिथि 5 सितंबर और पत्र आवेदक को *7 सितंबर* को प्राप्त हुआ। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि आवेदक समय पर सुनवाई में उपस्थित न हो सके, इसलिए जानबूझकर पत्र में देरी की गई।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रथम अपील 6 अगस्त को हुई है तो उसी पत्र में सुनवाई की तिथि *5 अगस्त को 12 बजे* किस आधार पर लिखी गई है? क्या यह विभाग की लापरवाही है या आवेदक को गुमराह करने की सोची-समझी साजिश?
*पारदर्शिता संदेह के घेरे में*
इस पूरे मामले से कबीरधाम जिला शिक्षा विभाग की पारदर्शिता संदेह के कटघरे में है। RTI अधिनियम का उद्देश्य शासन-प्रशासन में पारदर्शिता लाना है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ही अधिनियम की अवहेलना कर रहे हैं।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है।

