डिंडोरी जिले के आदिवासी बाहुल्य जिले में मेहंदवानी विकासखंड जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कोटरई में नियमों के विपरीत पटाखों की खरीदी का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सामने आए बिल में क्षेत्री मटेरियल सप्लायर से लगभग 4,400 रुपये से अधिक के पटाखों की खरीदी दर्शाई गई है, जबकि पंचायत कार्यों में ऐसी सामग्री की आवश्यकता और भुगतान की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। आखिरकार किया भी क्या जा सकता है। सरकार की सत्ता और ठेकेदार की दबंगई के चलते जनपद के अधिकारी से लेकर ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव तक यहां महाशय से हर कोई दबी जुबान में ही बात करते हैं इनकी ठेकेदारी और दबंगई के चलते जनपद के अधिकारी भी नतमस्तक हो गए हैं यहां ठेकेदार बहुत कम समय में ही अपनी दबंगई के चलते सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अच्छा खासा आशियाना तैयार कर चुके हैं और उनके बिल लगभग सभी ग्राम पंचायत में लगाए जाते हैं जहां बहुत आसानी से फर्जी बिलों का भुगतान किया जाता है और जनपद के उच्च अधिकारियों के साथ उनकी काफी मिली भगत भी चलती है जिसके चलते GST बिलों में फर्जी भुगतान बहुत आसानी से कर दिया जाता है और जनपद में बैठे मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रमोद ओझा किसी भी ग्राम पंचायत में कड़ी कार्रवाई करते नजर नहीं आते हैं उनके स्वस्थ रवैया के चलते ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव के होंसले लगातार बुलंद होते नजर आ रहे हैं इसीलिए तो ग्राम पंचायत में मनमाने फर्जी भुगतान बड़ी आसानी से हो जाते हैं जैसा की एक जीता जागता उदाहरण आप देख ही सकते हैं कि ग्राम पंचायत में किस कदर पैसों की होली खेली जा रही है पटाखों के नाम पर फर्जी किस कदर भुगतान किया गया है आखिरकार ग्राम पंचायत में क्या जरूरत पड़ी जहां पटाखे की आवश्यकता पड़ी यहां तो समझ से परे है मेहंंदवानी विकासखंड जनपद पंचायत में अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक भ्रष्टाचार की होली खेल रहे हैं आखिरकार सरपंच सचिव उपयंत्री और ठेकेदार की कब तक ग्राम पंचायत में दबंगई चलती रहेगी यहां तो अपने आप में एक अहम सवाल है और कब तक फर्जी बिलों का भुगतान लगातार जारी रहेगा कब तक ग्रामीणों का शोषण यूं ही होता रहेगा
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत, जनपद स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों और कुछ सप्लायरों की मिलीभगत से शासन की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि जिस सप्लायर के नाम से बिल लगाया गया है, उसका मुख्य व्यवसाय निर्माण सामग्री से जुड़ा बताया जाता है, ऐसे में पटाखों की बिक्री और खरीदी को लेकर संदेह और गहरा गया है।
आरोप है कि बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के ऐसे बिलों का भुगतान आसानी से स्वीकृत कर दिया जाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित बिल, खरीदी प्रक्रिया और भुगतान की जांच कराई जाए तथा यह स्पष्ट किया जाए कि पंचायत को पटाखों की खरीदी की आवश्यकता क्यों पड़ी।
ग्रामीणों ने मांग लिया
1.पटाखों की खरीदी और भुगतान की जांच हो।
2.बिलों की वैधता और सामग्री की वास्तविक आपूर्ति का सत्यापन किया जाए।
अनियमितता पाए जाने पर दोषियों पर कार्रवाई हो
