कबीरधाम के वनांचलों में खाईवाली जुए का फड़ की चर्चा :पुलिस की निगरानी पर उठे सवाल
कवर्धा। कबीरधाम जिले में अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस लगातार कार्रवाई का दावा करती है, लेकिन जिले के कुछ वनांचल क्षेत्रों में कथित रूप से जुए के फड़ संचालित होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तरेगांव, पंडरिया और कुकदूर थाना क्षेत्रों के जंगलों में कुछ स्थानों पर कथित रूप से जुआ खेलने के लिए फड़ लगाए जाने की गतिविधियां चल रही हैं। सूत्रों का दावा है कि इन स्थानों पर दूर-दराज से लोग पहुंचकर रुपये-पैसों की बाजी लगाते हैं और गतिविधि को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वनांचल क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियां चल रही हैं, तो संबंधित थाना पुलिस और सूचना तंत्र को इसकी जानकारी है या नहीं?
छोटे जुआरियों पर कार्रवाई, बड़े फड़ संचालक कब पकड़ में आएंगे?
जिले में पुलिस द्वारा समय-समय पर जुआरियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती रही है। इसके बावजूद यदि सूत्रों की सूचना सही है और जंगलों में फिर से जुए के फड़ संचालित हो रहे हैं, तो कार्रवाई के बावजूद इन गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा है?
सवाल केवल जुआ खेलने वालों की गिरफ्तारी का नहीं है। असली सवाल यह है कि जुए के फड़ कौन संचालित कर रहा है, इसके पीछे कौन लोग हैं और इतनी बड़ी गतिविधि की जानकारी पुलिस तक क्यों नहीं पहुंच पा रही है?
पुलिस की सूचना व्यवस्था पर भी सवाल
वनांचल क्षेत्रों में पुलिस की पहुंच और स्थानीय सूचना तंत्र अपराध नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में यदि किसी स्थान पर लगातार जुआ खेलने वालों का जमावड़ा हो रहा है, तो क्या इसकी जानकारी पुलिस के मुखबिर तंत्र तक नहीं पहुंच रही?
या फिर जानकारी मिलने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो पा रही?
इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पुलिस से अपेक्षा—सूचना की जांच हो
सूत्रों से मिली इस जानकारी के बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों से अपेक्षा है कि तरेगांव, पंडरिया और कुकदूर थाना क्षेत्रों के वनांचल में संदिग्ध स्थानों की निगरानी कराकर वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए।
यदि सूचना गलत है तो पुलिस की जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, और यदि जुए के फड़ संचालित होने की बात सही पाई जाती है तो सिर्फ जुआ खेलने वालों तक कार्रवाई सीमित न रहकर फड़ संचालित करने वाले लोगों की पहचान और भूमिका की भी जांच जरूरी होगी।
अब देखना यह है कि सूत्रों से सामने आई इस सूचना को पुलिस कितनी गंभीरता से लेती है और क्या वनांचल क्षेत्रों में जुए के कथित फड़ों तक पुलिस की कार्रवाई पहुंचती है।

