बैगा आदिवासी गांव में पांच बच्चों की मौत से हड़कंप, 15 कुपोषित बच्चे अस्पताल में भर्ती
नंदनी कुमान गांव पहुंची प्रशासनिक टीम, बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों की निगरानी; स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
Rk khan
कवर्धा। छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश की सीमा से लगे कबीरधाम जिले के बोड़ला ब्लॉग अंतर्गत नंदनी कुमान गांव में बैगा आदिवासी समुदाय के पांच बच्चों की कुछ महीनों के भीतर मौत होने से हड़कंप मच गया है। लगातार हो रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम गांव पहुंची। जांच के दौरान 15 कुपोषित बच्चों को तत्काल बोड़ला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। यहां बच्चों को 15 दिनों तक पोषक आहार देने के साथ डॉक्टरों की निगरानी में उनकी देखभाल की जा रही है। बच्चों की मौत से गांव में शोक का माहौल है।
घटना ने बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और कुपोषण से निपटने के सरकारी प्रयासों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदिवासी नेता ने स्वास्थ्य विभाग पर स्वास्थ्य शिविरों के नाम पर केवल औपचारिकता निभाने और राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बच्चों के स्वास्थ्य पर गंभीरता से ध्यान दिया गया होता, तो स्थिति इतनी चिंताजनक नहीं होती।
जागरूकता अभियान के बावजूद हालात चिंताजनक
बैगा आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर समस्याएं सामने आ रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी की स्थिति में अस्पताल पहुंचकर उपचार कराने के बजाय कुछ लोग आज भी झाड़-फूंक पर निर्भर रहते हैं। समय पर उचित इलाज और पोषण की कमी बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
स्वास्थ्य जांच के दावों पर सवाल
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि संबंधित क्षेत्र और गांव में लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाकर लोगों की जांच की गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के बावजूद 15 बच्चे कुपोषण की स्थिति तक कैसे पहुंचे और पांच बच्चों की मौत के मामलों को समय रहते क्यों नहीं रोका जा सका?
अब जरूरी है कि बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों की जांच हो, प्रभावित परिवारों को सहायता मिले और गांव में स्वास्थ्य सेवाओं तथा पोषण व्यवस्था की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाए।

