कलेक्टर के जाते ही बोड़ला CHC की सुधरी व्यवस्था फिर धड़ाम, मरीज घर से चादर लाने को मजबूर
क्या औचक निरीक्षण की सूचना हो गई थी लीक? स्वास्थ्य केंद्र में बैकअप सिस्टम पूरी तरह फेल
बोड़ला/कबीरधाम:
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) बोड़ला में प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर एक बार फिर उजागर हो गया है। हाल ही में कलेक्टर के औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त नजर आई थीं और सभी बेडों पर चमचमाती नई बेडशीट बिछाई गई थीं। हालांकि, कलेक्टर के निरीक्षण समाप्त कर लौटते ही अस्पताल प्रशासन का ढर्रा पुनः पुराने ढर्रे पर लौट आया है और मरीज अब भी घर से चादर लाने को मजबूर हैं।
औचक निरीक्षण की गोपनीयता पर उठे सवाल
स्वास्थ्य केंद्र की इस बदलती तस्वीर ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि यदि कलेक्टर का दौरा वाकई 'आकस्मिक' था, तो निरीक्षण के दौरान अचानक नई चादरें और चाक-चौबंद व्यवस्थाएं कहां से आ गईं? यह सवाल भी गहरा रहा है कि क्या जिला कलेक्टर कार्यालय से दौरे की गोपनीय जानकारी स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों तक पहले ही लीक कर दी गई थी?
स्वास्थ्य नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां
स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, अस्पतालों में मरीजों के लिए अतिरिक्त बेडशीट का बैकअप होना अनिवार्य है, ताकि एक सेट धुलने जाने पर दूसरा सेट तुरंत इस्तेमाल किया जा सके। लेकिन बोड़ला स्वास्थ्य केंद्र में यह बैकअप सिस्टम पूरी तरह फेल नजर आ रहा है।
अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इस बात की निष्पक्ष जांच कराएगा कि औचक निरीक्षण की सूचना कैसे लीक हुई और मरीजों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रखने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
बीएमओ - पुरषोत्तम राजपूत का कहना है कि जिस बेड में मरीज नही रहते उसमे चादर नही रहता है बाकी मरीज आने के बाद उसमें चादर दिया जाता है नियम यह है कि मरीज रहे न रहे दिन के हिसाब से सभी रंग के चादर बेड में होने चाहिए फ़िलहाल मामले में बीएमओ ने जानकारी नही है बोला है

