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साइबर जागृति अभियान का असर: संदिग्ध कॉल से सतर्क हुई महिला, साइबर थाने पहुंचकर की शिकायत

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साइबर जागृति अभियान का असर: संदिग्ध कॉल से सतर्क हुई महिला, साइबर थाने पहुंचकर की शिकायत

 साइबर जागृति अभियान का असर: संदिग्ध कॉल से सतर्क हुई महिला, साइबर थाने पहुंचकर की शिकायत



आधार-पैन की गोपनीय जानकारी मांगने वाले संदिग्ध फोन कॉल से मचा हड़कंप, पुलिस ने नागरिकों से निजी दस्तावेज साझा नहीं करने की अपील की



कवर्धा/कबीरधाम। साइबर अपराधों से आम नागरिकों को सुरक्षित रखने और ऑनलाइन ठगी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से कबीरधाम पुलिस द्वारा चलाया जा रहा “साइबर जागृति अभियान” लोगों में जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अभियान के अंतर्गत पुलिस द्वारा गांव-गांव, स्कूल-कॉलेज, बैंक एवं सार्वजनिक स्थानों पर चौपाल और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं।


इसी जागरूकता का एक उदाहरण हाल ही में सामने आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिले की एक महिला को किसी अज्ञात संदिग्ध मोबाइल नंबर से फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति द्वारा महिला से उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड एवं अन्य निजी/गोपनीय दस्तावेजों की जानकारी व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजने की मांग किए जाने की बात सामने आई है।


महिला को फोन करने वाले संदिग्ध नंबर की पहचान Truecaller पर “TI निषाद लोहारा” के नाम से प्रदर्शित होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, इस नाम या नंबर का किसी वास्तविक पुलिस अधिकारी से संबंध होने की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। इसलिए इस संबंध में किसी व्यक्ति विशेष के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।


महिला ने दिखाई जागरूकता, सीधे साइबर थाना पहुंचकर की शिकायत


संदिग्ध फोन कॉल को गंभीरता से लेते हुए महिला ने किसी प्रकार की निजी जानकारी साझा करने के बजाय तत्काल साइबर थाना, कवर्धा पहुंचकर लिखित शिकायत प्रस्तुत की।


शिकायत के बाद साइबर थाना प्रभारी द्वारा महिला को समझाइश दी गई कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति के फोन, व्हाट्सऐप संदेश अथवा अन्य माध्यम से मांगे जाने पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक संबंधी जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन, एटीएम पिन, सीवीवी अथवा अन्य संवेदनशील दस्तावेज साझा नहीं करने चाहिए।


पुलिस की ओर से यह भी समझाया गया कि केवल मोबाइल स्क्रीन पर किसी नाम का प्रदर्शित होना इस बात का प्रमाण नहीं है कि फोन करने वाला व्यक्ति वास्तव में उसी पद या विभाग का अधिकारी है।


पुलिस की जागरूकता से बढ़ रहा शिकायत करने का भरोसा


साइबर जागृति अभियान का उद्देश्य केवल साइबर अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले नागरिकों को सावधान करना भी है। पुलिस द्वारा लगातार लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि साइबर अपराधियों से डरने के बजाय तुरंत पुलिस अथवा साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।


विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट, फर्जी पुलिस अधिकारी, फर्जी बैंक अधिकारी, केवाईसी अपडेट, इनाम/लॉटरी, फर्जी भुगतान स्क्रीनशॉट, ओटीपी और यूपीआई से संबंधित ठगी के मामलों में सावधानी बरतने की अपील की जा रही है।


कबीरधाम पुलिस की प्रमुख चेतावनियां


1. “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर न डरें

साइबर अपराधी कई बार पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल अथवा फोन के माध्यम से लोगों को डराते हैं। पुलिस द्वारा नागरिकों को ऐसे दबाव में आकर पैसे ट्रांसफर न करने और तुरंत संबंधित एजेंसी/पुलिस से सत्यापन करने की सलाह दी जाती है।


2. आधार-पैन सहित निजी दस्तावेज किसी अनजान व्यक्ति को न भेजें

किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, सेल्फी, हस्ताक्षर या अन्य व्यक्तिगत दस्तावेज व्हाट्सऐप अथवा किसी अन्य माध्यम से साझा न करें।


3. OTP, UPI PIN, CVV और ATM PIN कभी साझा न करें

बैंक या किसी वैध संस्था का अधिकारी बनकर कोई व्यक्ति ऐसी गोपनीय जानकारी मांगे तो सावधान रहें। किसी भी परिस्थिति में OTP, UPI PIN, CVV अथवा ATM PIN साझा न करें।


4. PhonePe/Google Pay की स्क्रीन देखकर भुगतान सफल न मानें

व्यापारियों और दुकानदारों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ग्राहक द्वारा भुगतान का स्क्रीनशॉट अथवा रिसीविंग स्क्रीन दिखाने मात्र से भुगतान प्राप्त हुआ न मानें। सामान देने से पहले अपने बैंक खाते/बैंकिंग ऐप में वास्तविक ट्रांजैक्शन की पुष्टि करें।


5. अनजान लिंक और ऐप से बचें

किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में AnyDesk, TeamViewer या किसी अन्य अनधिकृत स्क्रीन-शेयरिंग/रिमोट-एक्सेस ऐप को इंस्टॉल न करें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से भी बचें।


6. Truecaller पर दिखने वाले नाम को अंतिम प्रमाण न मानें

मोबाइल नंबर पर प्रदर्शित नाम या पहचान से किसी व्यक्ति की सरकारी पद पर नियुक्ति अथवा वास्तविक पहचान स्वतः प्रमाणित नहीं होती। सरकारी अधिकारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति से आवश्यक होने पर संबंधित कार्यालय के आधिकारिक नंबर के माध्यम से सत्यापन करें।


ठगी होने पर घबराएं नहीं, तुरंत 1930 पर करें शिकायत


यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर फ्रॉड हो जाता है या उसके बैंक खाते से अनधिकृत राशि निकल जाती है, तो समय गंवाए बिना साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए।


इसके साथ ही संबंधित बैंक को तत्काल सूचना देकर खाते/लेन-देन को सुरक्षित कराने का प्रयास करें और उपलब्ध स्क्रीनशॉट, मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप चैट, कॉल विवरण, बैंक ट्रांजैक्शन एवं अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें।


पुलिस की अपील


कबीरधाम पुलिस द्वारा जिलेवासियों से अपील की जा रही है कि साइबर अपराध से डरें नहीं, जागरूक रहें और संदिग्ध गतिविधि की तत्काल सूचना दें। किसी भी अज्ञात व्यक्ति पर केवल उसके द्वारा बताए गए पद, नाम या मोबाइल स्क्रीन पर प्रदर्शित पहचान के आधार पर विश्वास न करें।


सतर्क नागरिक ही सुरक्षित नागरिक है।


साइबर अपराध से बचाव का मूल मंत्र —

“रुकें • सोचें • सत्यापन करें • फिर कोई कार्रवाई करें।”

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