डिंडोरी | मेहदवानी
जनपद पंचायत मेहदवानी अंतर्गत प्राथमिक शाला देवारगढ़ में शिक्षा के नाम पर नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। जिस स्कूल को बच्चों के भविष्य की नींव बनना चाहिए, वहीं उनसे झाड़ू-पोंछा और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जा रहे हैं।
मामले में स्कूल के प्रधान अध्यापक लक्ष्मण साहू का बयान और भी चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा —
“अगर बच्चों से काम नहीं कराएंगे तो फिर कौन करेगा?”
इस बयान से यह स्पष्ट हो जाता है कि विद्यालय में बच्चों का शोषण स्वयं शिक्षकों की जानकारी और सहमति से हो रहा है।
ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि स्कूल में नियमित रूप से बच्चों से साफ-सफाई और अन्य काम कराए जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जब इस संबंध में शिक्षकों और संकुल प्राचार्य से बात की गई तो उनका कहना था —
यह जवाब शिक्षा विभाग के नियमों और बाल अधिकार कानूनों की खुली अवहेलना है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम और बाल श्रम कानून के तहत किसी भी छात्र से इस तरह का काम कराना अपराध की श्रेणी में आता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या इस गंभीर मामले में दोषी शिक्षकों पर कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबाकर छोड़ दिया जाएगा?
ग्रामीणों ने जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि स्कूल बच्चों के लिए फिर से शिक्षा का मंदिर बन सके, न कि शोषण का केंद्र।
